तालिबान कौन है और इसका इतिहास क्या है?

क्‍या है तालिबान का इतिहास और क्‍यों ये संगठन है इतना खतरनाक | What is the history of Taliban and why is this organization so dangerous?

इधर भारत 15 अगस्त को अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा था उस समय दुनिया के कोने में एक देश गुलामी की जंजीरों में बंध रहा था। जी हां हैम बात कर रहे है अफगानिस्तान (country) की। जिस अफ़ग़ानी सेना को अमेरिका (country) ने दशकों तक इतनी कड़ी ट्रेनिंग दी थी उसी सेना ने बिना लड़े ही तालिबानी लड़ाकों के सामने सरेंडर कर दिया।

अफगानिस्तान (Afghanistan) के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अपने साथ हेलीकॉप्टर में कई लग्ज़री कार और बेशमुार नक़दी लेकर देश छोड़ गए। लेकिन अफ़ग़ान की जनता मझधार में फंस गई है, जहां से निकलना बहुत ही मुश्किल नज़र आ रहा है। खैर आखिर ये तालिबान (Taliban) कौन है और क्यों ये इतना ताकतवर बन गया कि चंद दिनों में पूरे देश पर कब्ज़ा कर लिया और दुनिया देखती रह गई।

तालिबान कौन है, कब, कहां और कैसे आया अस्तित्व में? Who is Taliban, when, where and how did it come into existence?

साल 1994 में सबसे पहले कंधार फिर उसके बाद 1995 में ईरान से लगे हेरात और फिर साल भर बाद 1996 में राजधानी काबुल (Kabul) को इस तालिबान ने पूरी तरह से अपने क़ब्ज़े में ले लिया था। 1996 में मुजाहिद्दीन नेता बुरहानुद्दीन रब्बानी (Burhanuddin Rabbani) को वहां की सत्ता से बेदख़ल कर दिया गया और फिर  शुरुआत होती है अफगानिस्तान में तालिबान के शासन की।

Taliban का मतलब

पश्‍तून भाषा में तालिबान का मतलब ‘छात्र’ होता है। एक तरह से यह उनकी शुरुआत को जाहिर करता है। कहते है कि आतंकवाद की जड़ हमेशा से पाकिस्तान (Pakistan) रहा है।

Taliban का जन्‍म

उत्तरी पाकिस्‍तान में सुन्‍नी इस्‍लाम का कट्टरपंथी रूप सिखाने वाले एक मदरसे में ही तालिबान का जन्‍म हुआ था। 1990 के आसपास जब सोवियत काल के बाद जो गृहयुद्ध छिड़ा उन शुरुआती सालों में तालिबान मजबूत हुआ।

वैसे ये भी कहा जाता है कि तालिबान की स्थापना ( Establishment of taliban) दक्षिणी अफगानिस्तान में हुई थी। मुल्ला मोहम्मद उमर (Mullah Mohammad Omar) इस इस्लामिक आतंकवादी समूह का संस्थापक ओर करता धर्ता था। मुल्ला मोहम्मद उमर पश्तून जनजाति का सदस्य था जो मुजाहिदीन कमांडर बन गया था।

मुल्ला मोहम्मद उमर ने ही 1989 में सोवियत संघ को देश से बाहर निकालने में मदद की। उसके बाद में साल 1994 में मुल्ला उमर ने कंधार (Kandhar) में 50 अनुयायियों का समूह बनाया। फिर उसने कंधार पर कब्जा कर लिया और 1996 में काबुल पर कब्जा कर लिया। वहां पर सख्त इस्लामी नियम लागू कर दिए। इन नियमों ने टेलीविजन (Television) और संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया।

इसके अलावा लड़कियों को स्कूल जाने से रोक दिया था और महिलाओं को बुर्का (Burka) पहनने के लिए मजबूर किया गया था। कुल मिलाकर पूरी तरह से हिंसक रवैया अख्तियार कर लिया था। जिसकी वजह से अवाम में तालिबान के प्रति नफरत ओर खौफ बढ़ता गया।

शुरुआत में लोग उन्‍हें बाकी मुजाहिदीनों के मुकाबले इसलिए ज्‍यादा पसंद करते थे क्‍योंकि तालिबान का वादा था कि भ्रष्‍टाचार और अराजकता खत्‍म कर देंगे।

लेकिन तालिबान के हिंसक रवैये और इस्‍लामिक कानून वाली क्रूर सजाओं ने जनता में आतंक फैला दिया। जिससे आज हालात ये है कि तालिबान के नाम मात्र से शहर के शहर खाली हो जाते है।

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