Aurangzeb History in Hindi | औरंगज़ेब का इतिहास हिंदी में

Aurangzeb History in Hindi

Aurangzeb History in Hindi -: एक महान मुग़ल शासक था। जिसने भारत देश में कई साल तक राज किया था। मुग़ल वंश में अकबर के बाद ये ही एक मात्र शासक है जिन्होंने इतने वर्षो तक शासन किया था। इस पोस्ट में ओरंगजेब की पूरी कहानी आपको बताएँगे।

भारत के महान शासको में से एक ओरंगजेब का नाम आता है। इन्होने काफी वर्षो तक भारत में शासन किया था। ओरंगजेब कट्टर मुस्लिम राजा था। मुग़ल साम्राज्य इनकी मौत के बाद लगभग खत्म हो चूका था। अकबर के बाद ओरंगजेब ने मुग़ल साम्राज्य का बहुत विस्तार किया। उनके शासन काल में राज्य में बहुत ही अच्छी कानून व्यवस्था थी। और उनका राज्य बहुत ही समुर्द और खुशहाल था।

अकबर की तरह ही ओरंगजेब ने मुग़ल साम्राज्य को बहुत आगे बढ़ाया था। नए नए नियम बनाये थे। लोगो की सुविधा के लिए अनेक कार्य किये थे। अकबर के शासन काल में हिन्दू और मुस्लिम एकता थी और आपस में कोई भेदभाव नहीं था। प्रजा अकबर के शासन काल में बहुत ही खुश थी लेकिन औरगजेब एक कट्टर मुस्लिम राजा था। और सवभाव से बहुत ही कठोर राजा था। और वो मुस्लिम धर्म का विस्तार चाहता था इसलिए उसने हिन्दुओ पर बहुत अत्यचार किये थे।

ओरंगजेब का जन्म और पारिवारिक इतिहास

पूरा नामअब्दुल मुज्जफर मुहीउद्दीन मोह्हमद औरंगजेब आलमगीर   
जन्म स्थानदाहोद , गुजरात
पिता का नाम शाहजहाँ
जन्म 14 अक्टूबर 1618
माता का नाम मुमताज
पत्नी का नाम उदैपुरी महल , झैनाबादी महल, बेगम नबाव बाई वऔरंगाबादी महल
बेटे का नाम सुल्तान मोह्हमद अकबर,मोह्हमद सुल्तान,आज़म शाह, मोह्हमद काम बख्श , बहादुर शाह,

ओरंगजेब का जन्म गुजरात के दाहोद में हुआ था ३ नवम्बर १६१८ को। उसके पिता का नाम शाहजाहाँ था और माता का नाम मुमताज महल था। ओरंगजेब शाहजहाँ और मुमताज की छठे नंबर की संतान थी और तीसरे नंबर का पुत्र था । ओरंगजेब के पिता उस समय गुजरात में सूबेदार के पद पर थे।

और उनके पिता ने गुजरात में विद्रोह किया था जो असफल रहा और बाद में ओरंगजेब और उसके भाई को बंदी बनाकर जहाँगीर के लाहौर दरबार में पेश किया गया। इसके बाद शाहजहाँ को मुग़ल सम्राट बनाया गया तब ओरंगजेब अपने माता पिता के साथ वापस अपने किले में लोटे थे। इसी किले में ओरंगजेब की प्रांरम्भिक शिक्षा हुई थी और यही से उसने फ़ारसी भाषा सीखी थ।

Aurangzeb का राजनीती में प्रवेश

मुग़ल साम्राज्य के कानून के अनुसार शाहजहाँ ने ओरंगजेब को दक्कन प्रदेश का सूबेदार बनाया था। ओरंगजेब ने खड़की का नाम बदल कर औरंगाबाद रख दिया था। इसके बाद ओरंगजेब ने राबिया दुर्रानी से विवाह किया और भोग विलास की जिंदगी जीने लगा था। और इधर शाहजहाँ ने अपने सभी काम का जिम्मा दारा सिकोह को सौंप दिया था। सभी कामकाज दारा ही देख रहा था।

इसी बिच एक हादसे में ओरंगजेब की बहन का जलने की वजह से निधन हो गया था लेकिन ओरंगजेब को मालूम था और फिर भी वह तीन दिन बाद घर आया था तो इस पर शाहजहाँ को बहुत गुस्सा आया । इसके बाद शाहजहाँ ने ओरंगजेब को सूबेदार के पद से हटा दिया था।

इसलिए ओरंगजेब सात महीनो तक दरबार में नहीं आया इसके बाद शाहजहाँ ने फिर से उसे सूबेदार बना दिया। इसके बाद ओरंगजेब ने बहुत ही अच्छे तरीके से काम किया और इसका उसे पुरुस्कार सवरूप बदखसखान और बाल्ख की भी सूबेदारी मिल गई।

इसके बाद ओरंगजेब को मुल्तान और सिंध प्रदेश का भी सूबेदार बनाया गया। इसी बीच उनकी लड़ाई फारसियो और सफ़वियो के साथ होगी रही और हर बार ओरंगजेब पराजित होता रहा। और उनके पिता इस बात से बहुत नाराज हो गए।

इसके बाद उन्हें फिर से दक्कन प्रदेश का सूबेदार बनाया गया लेकिन जब गोलकुंडा और बीजापुर की लड़ाई का निर्णायक समय था तब शाहजहाँ ने अपनी सेना को वापस आने का आदेश दे दिया। इस बात से ओरंगजेब टूट गए थे उन्हें बहुत बुरा लगा क्योकि ये निर्णय शाहजहाँ खुद नहीं बल्कि दारा सिकोह के कहने पर लिया था।

राज्य के लिए सत्ता संघर्ष

Aurangzeb को सत्ता के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। जब शाहजहाँ की तबियत बहुत ख़राब थी तो सबको ये लग रहा था की अब उनका बचना संभव नहीं है। इसलिए ओरंगजेब और उनके भाइयो के बीच राज्य पर अधिकार को लेकर लड़ाई शुरू हो गई। ओरंगजेब के भाई शाह सुजा ने खुद को बंगाल का राजपाल घोसित कर दिया था

लेकिन शाहजहाँ की तबियत ठीक हो गई और उसने आदेश दिया की शाह सुजा को गिरफ्तार करके उसके सामने पेश किया जाये। ये बात शाहशुजा को पता लग चुकी थी। और वो बचने के लिए बर्मा के अरकान क्षेत्र में जाकर क्षुप गया। कुछ समय बाद ओरंगजेब ने धोखे से शाहजहाँ को आगरा के किले में बंद कर दिया और खुद को राजा घोषित कर दिया और दारा सिकोह को पकड़ कर फांसी दे दी।

Aurangzeb की साम्राज्य विस्तार योजना

ओरंगजेब के शासन काल में बहुत से विद्रोह को दबाया गया। बहुत सी चढ़ाई की गई। बहुत से राज्यों पर कब्ज़ा किया गया। उनका पश्चिम में सिख शक्ति से बहुत बार सामना होता रहा। लेकिन इसी बीच शिवजी पेशवा की सेना ने उसके लिए बहुत सी मुस्किले खड़ी कर दी। मराठी सेना ने ओरंगजेब की नाक में दम कर रखा था। और शिवजी की मृत्यु के बाद भी मराठी सेना कमजोर नहीं पड़ी और युद्ध में भाग लेती रही। और ओरंगजेब को ललकारती रही।

औरंगज़ेब के प्रशासन में हिन्दू के प्रति रवैया

ओरंगजेब के दरबार में बहुत ज्यादा हिन्दू बड़े पदों पर नियुक्त थे। बहुत से अहम् पदों पर हिन्दू लोग नियुक्त थे। ऐतिहासिक प्रमाण के हिसाब से ओरंगजेब के पिता के दरबार में हिन्दुओ की संख्या बहुत कम थी लेकिन ओरंगजेब के दरबार में इसकी संख्या बहुत अधिक थी। ऍम अथर अली के हिसाब से अगर देखा जाये तो शाहजहाँ हिन्दू मनसबदारो के से पक्षपात वाला रवैया रखते थे। ओरंगजेब की सेना में बड़े पदों पर बहुत से राजपूत योद्धा नियुक्त थे जब भी मराठो और सिखों से ओरंगजेब का युद्ध हुआ उस समय युद्ध में सेना की कमान हमेशा राजपूत सेनापति के हाथ में होती थी और कहा जाता है की किसी समय शिवजी महाराज भी ओरंगजेब की सेना में सेनापति रह चुके थे

Aurangzeb (History in Hindi) का व्यक्तित्व कैसा था

ओरंगजेब एक बहुत ही साधारण जीवन व्यतीत करता था। वो बहुत सी सरल खान पान और सरल कपड़े पहनना पसंद करता था। और बहुत ही शांत सवभाव का था। वह राजा होते हुए भी अपने जीवन का निर्वाह कुरान की नक़ल और टोपिया सिलकर और उनको बेचकर पैसे कमा लेता था और अपना गुजारा करलेता था

Aurangzeb की मातृभाषा (History in Hindi)

मुग़ल साम्राजय में ब्रज भाषा बहुत प्रचलित थी। और Aurangzeb (History in Hindi) के शासन काल में ब्रज भाषा को बहुत अधिक संरक्षण भी मिला था। ओरंगजेब के दरबार में ब्रज भाषा को प्रोत्साहित किया जाता था। ओरंगजेब को ब्रजभाषा के महाकवि देव को भी संरक्षण दिया था और एक बड़े महाकवि वृन्द भी ओरंगजेब के प्रशासन में पड़े पद पर नियुक्त थे। लेकिन ओरंगजेब के शासन काल में आधिकारिक भाषा फ़ारसी थी जो भी कार्य होते थे वो फ़ारसी भाषा में लिखे होते थे। लेकिन शाहजहाँ के शासन काल से ही सभी दरबारियों की बीच हिंदी उर्दू भाषा भी प्रचलित हो चुकी थी। ओरंगजेब का बेटा भी हिंदी भाषा में ही बातचीत किया करता था।

Aurangzeb की धार्मिक निति कैसी थी?

ओरंगजेब ने इस्लाम धर्म को आधार बनाते हुए राज्य के शासन को चलाया था। उसने सिक्को पर कलमा और नौ रोज का त्यौहार भांग की खेती को बंद करवा दिया था और गाने बजाने पर रोक लगा दी थी। उसने हिन्दू मंदिरो को तुड़वा दिया था। और सती प्रथा को बिलकुल बंद करवा दिया। तीर्थ सथानो पर कर दोबारा लागु कर दिया। सभी बड़े नगरों में ओरंगजेब ने मुहतसिब (जो एक अधिकारी होता है ) को नियुक्त कर दिया। और इस्लाम की सरियत के विरुद जो भी कर थे उनको खत्म कर दिया। इसके बाद ओरंगजेब ने मथुरा के ब्रज में आने वाले हिन्दुओ पर जज्या कर लागु कर दिया था और जबरदस्ती हिन्दुओ को मुस्लिम बनाया जाने लगा था। ओरंगजेब ने हिन्दुओ पर बहुत ज्यादा अत्याचार किये थे इसका उल्लेख उस समय के कवियों के द्वारा किया गया था।

जजिया कर क्या था

जज्या कर हिन्दुओ पर लागु किया गया था और ये Aurangzeb के समय में लागु किया गया। इसमें मुस्लिम जबरन हिन्दुओ से कर वसूलते थे। अकबर बादशाह के समय में ये कर समाप्त कर दिया गया था। लेकिन ओरंगजेब ने इस कर को दोबारा से लागु करवा दिया था। ये कर और अन्य करो से अलग था इस कर के तीन स्तर थे जिन लोगो की आमदनी कम थी या बेरोजगार थे उन लोगो पर ये कर लागु नहीं होता था। इसके बाद जो लोग हिन्दुओ में सबसे ऊपर आते थे जैसे ब्राह्मण और सरकारी पदाधिकारी भी इस कर से बाहर थे। हिन्दुओ के आलावा मुसलमानो को भी एक कर देना पड़ता था जिसका नाम जकात था। जो हर उच्च और अमीर वर्ग के लिए लागु था।

ओरंगजेब के द्वारा किये गए मंदिर निर्माण और विध्वंस

  • मुग़ल शासक Aurangzeb (History in Hindi ) ने जितने भी मंदिर तुड़वाये थे
  • उससे कही ज्यादा बनवाये भी थे।
  • मुग़ल शासन काल में मंदिरो को तोडना बहुत दुर्लभ घटना माना जाता था।
  • और अगर कोई मंदिर तोडा भी जाता था
  • तो इसके पीछे कोई न कोई राजनितिक कारन जरूर होता था।
  • ऐतिहासिक प्रमाण के मुताबिक जो भी मंदिर तोड़े गए थे
  • उनमे राजा के खिलाफ विद्रोहियों ने शरण ली थी या राज्य में अराजकता फैलाने वाले लोगो का उससे सम्बान्ध था।
  • मथुरा का जो केशव राय तोडा गया था
  • उसमे कोई धार्मिक कारण नहीं था
  • इसके पीछे भी एक कहानी है।
  • मथुरा के जाटो ने मुग़ल शासन के खिलाफ विद्रोह किया था
  • इसलिए इस मंदिर को तोडा गया था।

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ओरंगजेब की मौत कैसे हुई थी

जिस समय ओरंगजेब का अंतिम समय नजदीक था उस समय मराठो की सैनिक शक्ति चरम सीमा पर थी। और मराठी सेना का मुकाबला मुग़ल सेना नहीं कर पा रही थी। इसलिए  Aurangzeb ने खुद सेना लेकर जाने का फैसला किया और और दक्षिण की और सेना लेकर रवाना हो गया। और पच्चीस साल तक वो इस अभियान में लड़ता रहा। और इसी अभियान के दौरान उसकी मौत हो गई। ओरंगजेब ने पचास वर्षो तक शासन किया था। अहमदनगर में उनकी मौत हो गई थी इसलिए उनको दौलताबाद में फ़क़ीर बुरहानुद्दीन की कब्र के पास बने अहाते में दफना दिया गया था। ओरंगजेब खुद को हिन्दुओ का शहंशाह मानता था और उसके पास बहुत अधिक दौलत थी लेकिन उसने अपनी वसीयत में लिखा था की उसकी कब्र को बहुत ही सादे तरीके से बनाया जाये और सादे तरीके से दफनाया जाये।

Aurangzeb के द्वारा बनवाये गए निर्माण सथल।

  • 167 ई. में लाहौर की बादशाही मस्जिद बनवाई थी।
  • 1678 ई. में बीबी का मक़बरा अपनी पत्नी रबिया दुर्रानी की स्मृति में बनवाया था।
  • दिल्ली के लाल क़िले में मोती मस्जिद बनवाई थी।

मुग़ल शासन काल में राजाओ का कालक्रम

Aurangzeb

 

 

बाबर
हुमायु
शेरशाह सूरी
अकबर
इस्लाम शाह सूरी
जहाँगीर
शाहजहाँ
ओरंगजेब
रफ़ी उल दौलत
रफ़ी उल दरजत
जंहादर शाह
बहादुर शाह प्रथम
फरकुसियर
रोशन अख्तर बहादुर
मुहि उल मलिलत
अहमद शाह बहादुर
अजीजुद्दीन
अली गौहर
अकबर शाह
बहादुर शाह
FAQ -:
Q -: औरंगजेब के काल में मुगल साम्राज्य में कुल कितने सूबे थे ?
Ans – औरंगज़ेब के समय सूबों की संख्या 20 थी.

Q -: औरंगजेब के बाद मुगल साम्राज्य का अगला उत्तराधिकारी कौन था?

Ans – आलमगीर द्वितीय(1754-1759ई.)

Q -: औरंगज़ेब की कितनी पत्नियां थी?

Ans –  नवाब बाई और उदैपुरी

Q -: औरंगजेब के बाद मुगल शासक कौन बना?

Ans – मुहम्मद शाह रंगीला

Q -: औरंगजेब के बेटे कितने थे?

Ans – बहादुर शाह प्रथम, मुहम्मद अकबर, मुहम्मद आज़म शाह, मुहम्मद कम बख़्श, मुहम्मद सुल्तान

Q -: औरंगजेब को जिंदा पीर क्यों कहते हैं?

Ans – औरंगजेब अपने खर्चे चलाने के लिए टोपिया सिलता था इसलिए उसको जिन्दा पीर कहा जाता है।
Q -: मुगल साम्राज्य के पतन के कारण क्या है?
Ans – धार्मिक निति। दक्कन निति। नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली के आक्रमण
Q -: मुगलों ने भारत पर कितने साल राज किया?
Ans – 49 साल

Q -: मुगल वंश का सबसे महान राजा कौन था?

Ans – जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर
Q -: औरंगजेब की मृत्यु के बाद राजा कौन बना?
Ans – बाजी राव

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