Veer Lorik Dev Story | वीर लोरिक ओर मंजरी की प्रेम कहानी

अगर आप North India से Belong करते हैं तो आपने Yaduvanshi वीर योद्धा Veer Lorik के बारे में तो सुना ही होगा। अगर आपने नही सुना तो कोई बात नही आपको इस पोस्ट में हम बतायेंगे। Uttar Pradesh के Sonbhadra से लगभग 5 किलोमीटर मारकुंडी के पहाड़ हैं। वहां एक पथ्थर है

जिसको लोग वीर लोरिक स्टोन (Veer Lorik Stone) या फिर वीर लोरिक पथ्थर के नाम से जानते है। ये पथ्थर कोई मामूली पथ्थर नही है। कहा जाता है कि ये पथ्थर Veer Lorik ओर Manjari के प्रेम और शौर्य की निशानी है। इसके आपपास के इलाके में एक स्थानीय लोरिकी गीत भी प्रचलित है जिसके मुख्य किरदार Veer Lorik ही हैं।

तो दोस्तो Kaun Hai Veer Lorik, Veer Lorik Ki Kahani Kya Hai ओर Manjari Kaun Hai 

आखिर उस पथ्थर, जिसको इनके प्रेम की निशानी माना जाता है उसके पीछे की क्या कहानी है? वो सब इस post में आगे हम जानने वाले हैं। आप बने रहिये आखिर तक।

वीर लोरिक कौन था |वीर लोरिक Ka Itihas

Veer Lorik एक ऐतिहासिक नायक थे। ये बहुत बलशाली होने के साथ जनमानस के हितैषी भी थे। वीर लोरिक का जन्म Uttar Pradesh के Baliya District के गऊरा गाँव में पंवार गोत्र के एक क्षत्रिय Yaduvanshi Ahir घराने में हुआ था। इनके काल के निर्धारण को लेकर हमेशा से विवाद रहा है।

कुछ विद्वान बताते हैं कि इनका जन्म ईसा पूर्व में हुआ था तो वही कुछ विद्वान इन्हें मध्य युग।मे पैदा हुआ मानते है। एक काव्य है लोरिकायन (Lorikayan)। इस काव्य को पंवारों से जुड़ा माना जाता है। पंवारों में ही राजा भोज (Raja Bhoj) हुये थे जिसके आधार पर कहा जाता है कि वीर लोरिक (Veer Lorik) की वंशावली राजा भोज से काफी मिलती जुलती है। बजरंगबली हनुमान (Lord Bajrangbali) के अंश कहे जाने वाले वीर लोरिक Yogmaya Maa Bhawani के बहुत बड़े भक्त थे और उन्हें स्वयं माँ का आशिर्वाद प्राप्त था। खैर

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Ahori Fort

Veer Lorik जाती के Ahir थे और Ahir जाती एक लड़ाकू जाती रही है। अच्छा … जनश्रुतियों के नायक रहे वीर लोरिक का Sonbhadra के Agori Fort से गहरा संबंध बताया जाता है। इस Ahori Fort के कुछ अवशेष तो मौजूद है लेकिन एक तो बहुत Ancient है और दूसरा कोई Anciant History के बारे में पुख्ता जानकारी भी नही है।

इतिहासकारों के अनुसार ये किला ईशा पूर्व का है और 10वी सताब्दी के आसपास इसका पुननिर्माण चंदेल (Chandel) ओर खरवार (Kharwar) राजाओं ने करवाया था। इस Agori Fort के ही अत्याचारी राजा मोलागत से Veer Lorik का युद्ध हुआ था।

जनश्रुतियों के अनुसार कहा जाता है कि वीर लोरिक को तांत्रिक सिद्धियां भी प्राप्त थी जिसके बल पर उन्होंने इस किले पर कब्ज़ा जमाया था। उन्होंने मोलागत (Molagat) राजा को पराजित किया था। इस युद्ध का कारण भी बताया जाता है कि वीर लोरिक ओर मंजरी की प्रेम कहानी ही था। (Love Story Of Veer Lorik And Manjari)

वीर लोरिक की सम्पूर्ण कहानी | Veer Lorik Ka Itihas

यह कहानी 5 वीं शताब्दी के समय की है, जहा Agori नामक एक राज्य हुआ करता था जो सोन नदी के किनारे स्थित था। अगोरी राज्य के शासक राजा मोलागत एक बहुत अच्छा राजा तो था लेकिन अच्छा राजा होने के बावजूद अपने ही राज्य के मेहर (Mehar) नाम के एक यादव व्यक्ति से ईर्ष्या करता था, क्योंकि वह यादव व्यक्ति शक्तिहीन था।

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जुआ शर्त

एक दिन राजा मोलागत (Raja Molagat) ने मेहर को एक जुआ के खेल के लिए आमंत्रित किया ओर यह नियम बनाया कि इस खेल का जो विजेता होगा वो राज्य पर शासन करेगा। मेहर ने राजा की इस शर्त को स्वीकार कर लिया और वे जुआ खेलने लगे। राजा सब कुछ हार गया और उसे अपना राज्य छोड़ना पड़ा। राजा की दुर्दशा देखकर, भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma) एक प्रच्छन्न भिक्षु के रूप में उसके सामने आए और उस राजा को कुछ सिक्के (Coin) दिए। साथ मे उन्होंने राजा को आश्वासन दिया कि एक बार उन सिक्कों के साथ खेलने के बाद वह अवश्य जीतेगा ओर उसका हारा हुआ राज्य उसको वापस मिल जायेगा।

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राजा ने ब्रह्म जी की आज्ञा मानी ओर खेल में जीत गया। उस दिन खेल में मेहर छह बार हार गया और साथ में अपनी पत्नी (Wife) जो गर्भवती (Pregnant) थी, उसको भी हार गया। सातवीं बार में, उन्होंने अपनी पत्नी के गर्भ को भी दाव पर लगा दिया ओर हार गया। लेकिन राजा मोलागत ने मेहरा के प्रति उदारता दिखाते हुए कहा अगर आगामी बच्चा लड़का होगा तो वह राज्य के अस्तबल में काम करेगा और अगर यह लड़की हुई, तो उसे हमारी रानी की सेवा में नियुक्त किया जाएगा जहां वो रानी की सेवा करेगी।

मंजरी का जन्म

दुर्भाग्य से मेहर के सातवें बच्चे का जन्म एक लड़की के रूप में हुआ और उसका नाम मंजरी (Manjari) रखा गया। घर पर मंजरी को चंदा नाम से बुलाने लगे। जब मोलागत राजा को यह बात पता चली की लड़की हुई है तो उसने उस लड़की मंजरी को लाने के लिए सैनिकों को मेहर के यहां भेजा। लेकिन मंजरी की मां ने अपनी बेटी को सैनिकों के साथ भेजने से मना कर दिया। इसके बजाय, उसने राजा को सैनिकों के हाथ संदेश भेजा कि यदि वह मंजरी को अपने साथ ले जाना चाहते हैं तो उसे पहले मंजरी के पति को मारना होगा।

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अब इधर मंजरी के माता-पिता मंजरी के लिए एक ऐसा रक्षक पति खोजने में लग गए थे जो शादी के बाद राजा मोलागत को हरा सके। मंजरी ने अपने माता-पिता को बलिया नाम के गांव जाने के लिए कहा। उस हैं में उन्हें अहीर शेर Lorik नाम का एक नौजवान मिलेगा। वह पिछले जन्म में उसका प्रेमी था और Raja Molagat को हराने में भी पूरी तरह से सक्षम है।

मंजरी ओर लोरिक विवाह और राजा मोलागत का वध| Veer Lorik Ka Itihas

Manjari और Lorik दोनों के परिवार आपस मे मिले और शादी तय हो गई।

मंजरी से शादी करने के लिए लोरिक परिवार (Veer Lorik Family) और लाखो लोगो के साथ सोन नदी के के तट पर पहुँचे।

इधर राजा मोलागत ने लोरिक से लड़ने के लिये और मंजरी पर कब्जा करने के लिए अपने सैनिकों को भेजा।

राजा की सेना और लोरिक ओर उसके साथ आये लोगों के बीच घमासान युद्ध छीड़ जाता है।

लोरिक युद्ध में पराजित होता प्रतीत हो रहा था। मंजरी एक असाधारण ओर प्रतिभावान लड़की थी।

Manjri Shiv Pooja

वह Veer Lorik के पास जाती है

उसे बताती है कि अगोरी किले के पास में ही गोतनी नामक गाँव है।

उस गाँव में Bhagwan Shiv का एक मंदिर मौजूद है

अगर वह उस मंदिर में जाकर भगवान से प्रार्थना करती है तो विजय Veer Lorik की ही होगी।

वह शिव का प्राचीन मंदिर आज भीं मौजूद है

जहा हर साल महाशिव रात्रि के त्यौहार Mahashivratri) के दिन, हजारो लोग शिव भगवान जी पूजा करने आते है।

लोरिक ठीक वैसा ही करते हैं जैसा मंजरी ने कहा।

मंजरी के पूजा करने से वीर लोरिक युद्ध में जीत जाते हैं

और इसके बाद दोनों एक-दूसरे से शादी कर लेते हैं।

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लोरिक द्वारा पथ्थर को काटना | Veer Lorik Stone

विदाई का समय आता है।

और गांव की सीमा छोड़ने से पहले मंजरी लोरिक को कुछ ऐसा करने के लिए कहती है

जिससे लोगों को याद रहे कि मंजरी ओर लोरिक एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।

वीर लोरिक ने मंजरी से पूछा कि उसे क्या करना चाहिए ताकि हमारा सच्चा प्यार अमर बन जाए,

और कोई भी प्यार करने वाला जोड़ा कभी भी इस जगह से निराश न लौटे।

मंजरी ने एक विशाल चट्टान की ओर इशारा करके कहा कि अपनी उसी तलवार से इस पथ्थर को काट दे

जिस तलवार से उसने राजा मोलागत को मारा था।

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वीर लोरिक के मंजरी के कहने पर उसी तलवार से चट्टान के दो टुकड़े कर दिये।

मंजरी ने चट्टान के एक टुकड़े की धूल से अपनी मांग भरी

ओर फिर उस पथ्थर को हमेशा से अपने सच्चे प्यार की निशानी के तौर पर छोड़ दिया।

तो दोस्तो ये थी वीर लोरिक (Veer Lorik Ki Kahani) की कहानी।

आपको हमारी ये वीर लोरिक (Veer Lorik Story) की कहानी कैसी लगी हमे कमेंट में जरूर बताना।

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