अंग्रेजों ने कैसे ख़त्म किया मुग़ल साम्राज्य? | How the British ended the Mughal Empire?

How the British ended Mughal Empire? : दोस्तों हम सब जानते हैं कि भारत कई बार बाहरी शक्ति को गुलाम बन चुका है।

लेकिन अगर किसी बाहरी शक्ति ने भारत को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। या कहें लूटा है।

तो निश्चित तौर पर वो अंग्रेज (British) थे। लेकिन जब अंग्रेज (British) भारत आए थे

तो उनके लिए भारत पर राज़ करना इतना आसान नहीं था

क्योंकि भारत के एक विशाल हिस्से पर मुगलों का राज़ हुआ करता था और मुगल (Mughal) उस दौर में कितने शक्तिशाली थे

How The British end Mughal Empire?

इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि कई कोशिशों के बाद भी अफगान से लेकर मराठा और राजपूत (Maratha and Rajput) तक उन्हें हरा नहीं पाये। लेकिन उसी दौर में जब अंग्रेजों ने भारत की धरती पर कदम रखा, तो उन्होंने मुगलों को भी अपना निशाना बना लिया। लेकिन ऐसी बीच उनकी एक अच्छी खासी रणनीति, जो उस समय इतनी नई और प्रभावी साबित हुई थी की कुछ दशकों में मुगलों ने अंग्रेजों के सामने घुटने तक दिए। आखिर अंग्रेजों (British) की वो रणनीति क्या और मुगलों की, वो कौन से कमजोर नस थी, जिसे पकड़कर अंग्रेज मुगलों से जीत गये? आज की इस पोस्ट में हम आपको यही सब बताने वाले हैं। इस पोस्ट को आखिर तक जरूर पढ़ना।

सोने की चिड़िया

ये वाक्य था सोलहवीं सदी (sixteenth century) के आखिरी साल का और उस वक्त भारत इतना संपन्न था कि दुनिया का उत्पादन का लगभग एक चौथाई हिस्सा तो भारत से ही पैदा होता था। और कहीं ना कहीं ये कारण था कि पूरी दुनिया भारत को बड़े गौर से देख रही थी। उस वक्त ही भारत को सोने की चिड़िया (Sone ki Chidiya) भी कहा जाता था। उस वक्त दिल्ली के तख़्त पर अकबर महान का शासन हुआ करता था और कहा ये भी जाता था कि अकबर अपने दौर में सबसे दौलतमंद बादशाह हुआ करते थे। लेकिन उसी दौर में अंग्रेजों के देश ब्रिटेन में गृह युद्ध का माहौल चल रहा था।

अंग्रेजों ने कैसे ख़त्म किया मुग़ल साम्राज्य?

महारानी एलिजाबेथ प्रथम (Queen Elizabeth I)  के शासन के दौरान ब्रिटेन की मुख्य इकोनॉमी कृषि पर निर्भर करती थी। लेकिन युद्ध और बर्बादी के दौरान इस वक्त ब्रिटेन दुनिया के उत्पादन का कुल 3-4 परसेंट उत्पादन कर पा रहा था।

उसी दौर में पुर्तगाल (Portugal) और स्पेन, ब्रिटेन (Britain) को पावर स्ट्रगल में काफी पीछे छोड़ चूके थे और माहौल ये था कि ब्रिटेन के लुटेरे नाविक पुर्तगाली जहाज (Portuguese ship) को लूटकर किसी तरह अपना काम चलाकर खुश हो जाया करते थे। उसी समय में एक ब्रिटिश नाविक को दक्षिण पूर्व एशिया समुद्री यात्रा के दौरान भारत की समृद्धि की दिशा में पता चला। इसके बाद सन 1600 ईस्वी (1600 AD) में 200 ब्रिटिश व्यापारी एक नई कंपनी बनाते है। जिसको नाम देते हैं ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company)। उस कंपनी को महारानी का भी सपोर्ट हासिल हो जाता है।

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अब बात भारत की करे तो अब तक अकबर (Mughal Badshah Akbar) मर गया था। जहाँगीर (Jahangir) को नया मुगलिया बादशाह बना दिया जाता है और इसी के साथ 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंग (Captain William Hawking), सूरत में सबसे पहले अपनी कंपनी के व्यापारिक जहाज (company’s trading ship) के साथ है। भारत में एक नई कंपनी यानी इंडिया कंपनी बनाने की घोषणा करते। अपने इसी व्यापारिक चोले को पहले हुए कैप्टन हॉकिंग और उनके साथ थॉमस रोग जहांगीर के दरबार में पहुँचते है और वो जहाँगीर को अपने खूसूरत और महंगे उपहारों (handsome and expensive gifts) और फायदेमंद व्यापारिक समझौते का प्रस्ताव देतें हैं।

फैक्ट्रियां

लेकिन उस वक्त डच (Dutch)और पुर्तगाली के दबाव के कारण जहाँगीर पहले तो ये प्रस्ताव ठुकरा देते हैं

लेकिन अंग्रेज (British) लगातार इसमें लगातार कुछ और बेहतर डील जोड़ते हुए बादशाह को लगातार प्रस्ताव भेजते रहते हैं

और एक वक्त बाद जहाँगीर अपने व्यापार करने की रॉयल परमिशन दे देते हैं।

सूरत, मुंबई, पटना, मद्रास जैसी जगहों पर, इसके बाद अंग्रेज अपनी फैक्ट्रियां स्थापित करने में व्यस्त हो जाते हैं।

इन फैक्ट्रियों ने लगभग सबको आकर्षित करना शुरू कर दिया था।

कई भारतीय व्यापारियों ने भी इन फैक्ट्रियों से जुड़ना शुरू कर दिया।

मुगलों अंग्रेजों का युद्ध

How the British ended Mughal Empire? : अपने व्यापार को फैलता देखकर अंग्रेजों का लालच और बढ़ जाता है और वो सत्ता को हथियाने के लिए मुगलों (Mughals) के खिलाफ़ 1686 में एक जंग छेड़ देते हैं। जिसमे उन्हें मुगलों के करारी हार का सामना करना पड़ता है। और शायद यही हार थी की अंग्रेजों (British) का दिमाग खुल गया। उन्हें अब नई तकनीक पर काम करना था, जो की था फुट डालो और राज करो (Divide and Rule)। इस युद्ध के बाद उन्होंने औरंगज़ेब (Aurangzeb) से माफ़ी मांगी। और आगे ऐसी कोई हरकत ना करने का वायदा भी किया। मुगलिया दरबार से उन पर कुछ जुर्माना लगाकर वापस से व्यापार करने के लिए छोड़ दिया गया।

और यहीं माफी मुगलों के खात्मे की एक बड़ी वजह बनती है। 1707 ईस्वी में औरंगजेब की मौत (death of Aurangzeb) ने मुगलों को आपस में ही ही लड़ाना शुरू कर दिया। कई लोग सल्तनत के बादशाह बनने के लिए आपस में लड़ने लगते हैं। इस लड़ाई और संघर्ष के दौरान कई कमजोर शासक बादशाह बनकर मुगलों (Mughals) की ही शक्ति को कम करने लगते हैं और यही पर अंग्रेजों (British) को अपने लिए एक मौका दिखाई देता है।

परसिया बादशाह का भारत पर आक्रमण

1717 में मुगल बादशाह एक बड़ी बेवकूफ़ी कर बैठते हैं।

अंग्रेजों को एक फरमान महज कुछ रकम की ऐन्युअल फीस में साल भर बिना लगान या कर चुकाए व्यापार करने का आदेश दे देते हैं।

इसी दौरान परसिया (Persia) का बादशाह भारत पर आक्रमण करता है

और यह आक्रमण इतना अचानक होता है कि परसियन सेना बड़ी आसानी से दिल्ली तक पहुँच जाती है।

जब स्थिती कठिन हो जाती है तो मुगल बादशाह (Mughal emperor) ने ₹17,00,00,000 रूपये, कई महंगे स्टोन और एक पीकॉक स्टोन (expensive stones and a peacock stone) देकर किसी तरह से दिल्ली को बचा लेते हैं।

इतनी बड़ी लूट के बाद गूगल कमजोर पड़ जाते हैं।

इसी बीच अंग्रेज बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला (Siraj-ud-Daulah) को अपने तख़्त से हटाने के लिए युद्ध छेड़ देते हैं।

क्योंकि अंग्रेजों के लिए ये जंग कठिन होने वाली थी

इसलिए उन्होंने इसे जीतने के लिए हिंदू और मुसलमानों के बीच डिवाइड एंड रूल (divide and rule) का इस्तेमाल करते है।

प्लासी के युद्ध

How the British ended Mughal Empire? : प्लासी के युद्ध (Battle of Plassey) में सिराजुद्दौला (Siraj-ud-Daulah) को हारने के बाद अग्रेज उन्ही के सेनापति जो अग्रेजों के साथ मिल गए थे । उन्हें बंगाल का नवाब (Nawab of Bengal) बना देते है। 1764 के बक्सर युद्ध (Battle of Buxar) में अग्रेज, बंगाल के नवाब और मुग़ल शासक शाह आलम द्वितये (Shah Alam II) की एकल सेना को हरा देते है। निजाम पर मराठो के साथ भी अंग्रेज अपनी ऐसी नीतियों का इस्तेमाल करके पहले उन्हें आपस में लड़ने को मजबूर कर देते हैं। और फिर उन्ही की कजोर हो चुकी सेना पर आक्रमण करके उस रियासत के सभी अधिकारों को अपने पास सुरक्षित कर लेते।

अंग्रेजों (British) ने 18वी सदी में खुद को सिर्फ कृषि तक ही नहीं रोका

बल्कि वो काफी बड़े हिस्से के व्यापार और जमीन के इस्तेमाल पर लगने वाले टैक्स (trade and tax) से भी कमाई करके अमीर बनते रहे। इसके लिए उन्होंने कई भारतीय जमींदारों (Indian landlords) को अपना खास बना लिया।

एजुकेशन पॉलिसी (education policy) के कारण भी देश के कई समाज सुधारक अंग्रेजों से काफी प्रभावित हो चूके थे।

जो अंग्रेजों का साथ देने लगे।

बहादुर शाह जफर

यही कारण था कि 1857 की क्रांति के दौरान भी अंग्रेजों को बहुत ही जमीदारों का साथ प्राप्त हुआ

जो आगे चलकर अंग्रेजों की जीत (victory of the British) की वजह भी बानी।

इस क्रांति में जीत के बाद आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर (Mughal emperor Bahadur Shah Zafar) को अंग्रेज बंदी बनाकर रंगून की जेल में भेज देते हैं।  उनके सभी बेटों को बड़ी क्रूरता के साथ मौत के घाट उतरवा देते हैं। इस तरह से मुगल और मुगल साम्राज्य (Mughal Empire) दोनों का ही अंत हो जाता है।

मुगलों (Mughals) के खात्मे के बारे में तो आप समझ गए होंगे।

लेकिन अग्रेजों को इस पूरी कहानी में देखें तो वो इतनी दूर से आये थे ।

उनके लिए इस देश की परिस्थितियां बिलकुल अलग थी।

उसके बावजूद जिस तरह उन्होंने असम में साम  दाम  दंड भेद का इस्तेमाल करते हुये मुग़ल बादशाओ (Mughal emperors) और उनकी रियासतों को पराजित किया

वो उनकी गहरी कूटनीति और व्यापारिक सूझबूझ को दिखती है।

आपकी मुगलों की हार (defeat of the Mughals?) के बारे में क्या राय है?

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