लोहड़ी का त्यौहार कब आता है लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? | Lohri Festival in Hindi

Lohri Festival in Hindi -: लोहड़ी का त्यौहार पंजाब में बड़े ही चाव से मनाया जाता है। ये उत्तर भारत का एक फेमस त्यौहार है। लोहड़ी के दिन सुबह से ही लोग इसकी तयारी करनी शुरू कर देते है। शाम को सभी लोग अपने परिवार के साथ इक्क्ठा होकर ख़ुशी से ये त्यौहार मानते है। और सभी लोग मिलकर आग जलाकर कर रेवड़ी और मिठाई आपस में बांटते है।

और मूंगफली से बनी गजक बड़े चाव के साथ खाई जाती है। महिलाये लोहड़ी के गीत जाती है। लोहड़ी का त्यौहार साल की शुरुआत में कड़कड़ाती ठण्ड के दिनों में आता है। इसे पंजाब में लोग मकर सक्रांति के नाम से भी जानते है। लोहड़ी के दिन लोग पुरे आनंद के साथ सब के साथ मिल जुल कर इस त्यौहार को मनाते है। इस त्यौहार के प्रति देश में लोगो की अलग अलग मान्यता है। सब लोग अपने तरीके से इस त्यौहार को मनाते है।

लोहड़ी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है। ? (Lohri Festival)

लोहड़ी को मकर सक्रांति भी कहते है। ये खासतौर पर पंजाब और हरियाणा में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। पतंग से आसमान भर जाता है। हर जगह पतंगबाजी होती है। शाम के समय लोग परिवार और करीबियों के साथ बैठ कर इस फेस्टिवल्स को मनाते है। पंजाब में इसको लोहड़ी , दक्षिण भारत में इसको पोंगल और काइट फेस्टिवल्स बोला जाता है।

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भगवान् शिव और माता सती

इस त्यौहार को मनाने के पीछे पुराणों और ग्रंथो में एक कथा प्रचलित है। जिसमे माता सती के देह त्याग की याद में पतिव्रता के रूप में मनाया जाता है। जब सती के पिता ने भगवान् शिव को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया और उनका अपमान करने लगे तब देवी सती ने यज्ञ कुंड में अपने आपको समर्पित कर दिया था। उनकी याद में ही इस त्यौहार को मनाया जाता है।

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दूल्हा भाटी

इसके आलावा एक कथा और प्रचलित है। दूल्हा भाटी के बारे में। पंजाब के इलाके में लड़कियों का सौदा किया जाता था। गरीब घर की लड़कियों को आमिर घरो में बेचा जाता था। तो दूल्हा भाटी ने उन सभी लड़कियों को उन से मुक्त करवाया था। और उनकी शादी का पूरा बंदोबस्त किया था। दूल्हा भाटी एक डाकू था लेकिन उसने सभी लड़कियों की जान बचाकर उनका विवाह हिन्दुओ से करवाया था और उनका कन्यदान खुद किया था। उनके लिए पिता की भूमिका निभाई थी। और उनके सम्मान की रक्षा की थी।  दूल्हा भाटी को पंजाब में नायक की उपाधि से नवाजा गया था। उसकी याद में भी ये त्यौहार मनाया जाता है। और दूल्हा भाटी की वीरता को याद किया जाता है।

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भगवान् कृष्ण लोहिता वध

एक पौराणिक कथा के अनुसार कृष्ण के मामा कंस ने कृष्ण जी को मारने के लिए एक राक्षशी को भेजा था जिसका नाम लोहिता था। श्री कृष्ण जी ने उनको खेल खेल में ही मार दिया था। और इसकी ख़ुशी में में लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है।

Lohri Festival कब मनाई जाती है?

लोहड़ी का त्यौहार जनवरी के महीने में मनाया जाता है। लोहड़ी के त्यौहार के समय कड़कड़ाती ठण्ड होती है। और लोग आग जलाकर अपने परिवार और मित्रो के साथ मिलकर रेवड़ी , गजक की मिठाई बांटते है। साथ में महिलाये। गीत गाकर लोहड़ी के त्यौहार को मनाती है। आजकल समय बदल रहा है लेकिन पहले के समय लोहड़ी के कई दिन पहले ही इसकी तयारी शुरू हो जाती थी बच्चे और नौजवान इसके जश्न की तयारी शुरू कर देते थे। घर घर जाकर दूल्हा भाटी के गीत शुरू हो जाते थे।

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लोहड़ी संगीत (Lohri Festival Song)

Lohri Festival से कई दिन पहले बच्चे और नौजवान घर घर जाकर लोहड़ी के गीत गाते है। और वीर दूल्हा भाटी को याद किया जाता है। और जैसे जैसे लोहड़ी का पर्व नजदीक आता है लोगो में उत्साह और अधिक बढ़ता जाता है। पतंग बजी शुरू हो जाती है। घरो को सजाया जाता है। और यही समय होता है। जब फसल लहलहा रही होती है। किसान भी खुस होता है। और ख़ुशी ख़ुशी इस त्यौहार को मनाता है। अपनी ख़ुशी से लोग जो भी कुछ देते है उनसे रेवड़िया लाते है। और बांटी जाती है। बाजार में दुकाने सज जाती है। नए कपड़े ख़रीदे जाते है।

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लोहड़ी पर्व पर बनने वाले पकवान और मिठाईया

Lohri Festival  पर पंजाब में और हरियाणा में स्पेशल मक्के की रोटी और सरसो का साग बनाया जाता है।
इसके साथ ही बाजार से रेवड़ी, मूंगफली और गजक खरीद कर लाते है। और सभी मिलकर आपस में बांटते है। और ख़ुशी ख़ुशी इस पर्व को मनाते है।

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Lohri Festival  का महत्व

पंजाब में लोहड़ी को बहुत ही खास पर्व के रूप में मनाया जाता है। और जिस घर में नया नया विवाह हुआ है। उस घर में बधाई दी जाती है। विवाहित बहन बेटियों को बुलाया जाता है। उनको नए कपड़े और मिठाई भेंट सवरूप दी जाती है।

लोहड़ी का कृषि में महत्व

Lohri Festival का त्यौहार उस टाइम पर आता है। जब फसल की बुआई और कटाई का समय होता है। किसान ख़ुशी से इस त्यौहार को मनाता है। लोग शाम के समय आग जलाकर इसके इर्द गिर्द नाचते है। साथ में गजक, रेवड़िया और मूंगफली बांटते है। इसके आलावा तिल के लड्डू बांटे जाते है। फसल काटने की ख़ुशी में किसान भी लोहड़ी को खुसी खशी मनाता है। और किसान अपनी आने वाली फसल के लिए कामना करते है। की उनकी फसल अच्छी हो

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Lohri Festival का अर्थ क्या होता है ?

लोहड़ी को पंजाब में मकर सक्रांति और अन्य राज्य में तिलोड़ी भी कहा जाता है। क्योकि इस दिन लोग आपस में गजक, मूंगफली और तिल के लड्डू आप में बांटते है। लोहड़ी शब्द दो शब्दों तिल और रोटी शब्द से मिल कर बना है। बाद में इसको बदल कर लोहड़ी कर दिया गया। इस दिन तिल और गुड़ बाँट कर खाने की परम्परा है। पंजाब में कई जगह पर इसको लोई और लोही भी कहा जाता है।

लोहड़ी पर्व में अग्नि का महत्व

Lohri Festival की शाम को सभी परिवार और पड़ोस के मित्र और साथीजन इक्क्ठा होकर लकड़ी की आग जलाते है। और इस अग्नि में तिल, मूंगफली और मक्की के दानो की आहुति देते है। और अग्नि की परिकर्मा करते है। और जिस समय लोहड़ी पर्व आता है। उस समय काफी जायदा ठण्ड होती है। इसलिए लोग अग्नि से सर्दी का भी बचाव करते है। और तिल के लड्डू और मूंगफली गजक का आनंद लेते है। माता सती ने भगवान् शिव के लिए अग्नि कुंड में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उसके लिए भी अग्नि की परिकर्मा की जाती है। महिलाये ये परिकर्मा करती है। और लहड़ी पर गीत गाती है।

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ईरान देख में लोहड़ी

Iran देश में भी लोहड़ी के पर्व की तरह ही नए साल का जश्न मनाया जाता है। और सूखे मेवे अग्नि को अर्पित किये जाते है।

लोहड़ी पर्व से सम्बंधित तथ्य

  • Lohri Festival का पर्व जन्वरी के महीने में आता है।
  • इस समय फसल के कटने और बुआई का समय होता है।
  • लोहड़ी के पर्व पर लोगो में काफी उत्साह होता है।
  • और हर जगह पतंग बाजी शुरू हो जाती है। आसमान पतंगो से भर जाता है।
  • पंजाब में लोहड़ी सिखो का एक प्रमुख पावन त्यौहार है। इ
  • सको काफी धूमधाम से मनाया जाता है।
  • जो सिख लोग भारत से बाहर रहते है। वो भी इसको काफी धूम धाम से मनाते है।
  • लोहड़ी को पंजाब में लोही या लोई के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस अवसर पर लोगो में गजक और मूंगफलिया बांटी जाती है।
  • लोहड़ी के पर्व पर खासतौर पर पंजाब में विशेष पकवान बनाये जाते है।
  • इसमें सरसो का साग और मक्के की रोटी बनाई जाती है। साथ में तिल के लड्डू बांटे जाते है।
  • भारत के महँ संत कबीर दास जी की पत्नी का नाम लोई था।
  • कहा जाता है की उनके नाम से ही इस पर्व का नाम लोहड़ी पड़ा था।
  • इसलिए पंजाब में अभी भी कई जगह पर लोहड़ी को लोई के नाम से जाना जाता है।
  • लोहड़ी के समय से कुछ दिन पहले बच्चे और नौजवान वर्ग के लोग लोहड़ी के गीत गाने षुरे कर देते है।
  • और साथ में सभी घरो में जाते है।
  • जहा लोग ख़ुशी से उनको कुछ न कुछ देते है। उनको खली हाथ नहीं भेजा जाता।
  • वो सभी युवा वर्ग और बच्चे मिलकर उन पैसो से मूंगफली और रेवड़ी खरीदते है
  • और सबके साथ मिलकर बांटते है। और इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते है।

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लोहड़ी से जुड़े कुछ प्रश्न और उत्तर (FAQ’s)

प्रश्न -: लोहड़ी क्यों मनाते हैं?
उत्तर -: लोहड़ी पारंपरिक तौर पर फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा एक ख़ास त्योहार है। इस मौके पर पंजाब में नई फसल की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन लड़के आग के पास भांगड़ा करते हैं, वहीं लड़कियां गिद्दा करती हैं

प्रश्न -: लोहड़ी का क्या अर्थ है?
उत्तर -: यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। इसको लोई या लोही भी कहा जाता है। लोहड़ी दो सब्दो से मिलकर बना है। तिल और रोटी। पहले इसको तिलोड़ी के नाम से जाना जाता था। बाद में इसको लोहड़ी के नाम से जाना जाने लगा

प्रश्न -: लोहड़ी कैसे बनाते हैं?
उत्तर -: लोहड़ी मनाने के लिए लकड़ियों की ढेरी पर सूखे उपले भी रखे जाते हैं। समूह के साथ लोहड़ी पूजन करने के बाद उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी एवं मूंगफली का भोग लगाया जाता है। और गीत गाये जाते है। गजक और तिल के लड्डू बांटे जाते है।

प्रश्न -: पंजाब में कौन सा त्यौहार मनाया जाता है?
उत्तर -: लोहड़ी

Lohri Festival in Hindi

प्रश्न -: मकर संक्रांति को क्या कहा जाता है?
उत्तर -: तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहते हैं, यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है

प्रश्न -: मकर संक्रांति का त्योहार कैसे मनाते हैं?
उत्तर -: शाम के समय अग्नि जलाकर उसकी परिकर्मा की जाती है। और साथ में तिल , गुड़ , चावल, मक्के की आहुति दी जाती है। और लोकगीत गाये जाते है। और घरो में विशेष पकवान बनाये जाते है। साथ में ही गजक और रेवड़िया बांटी जाती है। लोग मक्के की रोटी और सरसो का साग खा कर इस पर्व को धूमधाम से मनाते है।

प्रश्न -: मकर संक्रांति कौन से राज्य में बनाई जाती है?
उत्तर -: बिहार में भी मकर संक्रांति को खिचड़ी के ही नाम से जानते हैं। यहां भी उड़द की दाल, चावल, तिल, खटाई और ऊनी वस्‍त्र दान करने की परंपरा है। इसके अलावा असम में इसे ‘माघ- बिहू’ और ‘ भोगाली-बिहू’ के नाम से जानते हैं। पंजाब में इसको लोहड़ी के नाम से जाना जाता है। और इसमें शाम के समय अग्नि जलाई जाती है। और इसकी परिकर्मा की जाती है। और तिल, चावल, और गुड़ की आहुति दी जाती है। सभी परिवार के लोग साथ बैठ कर गजक और मूंगफलिया बांटते है और इस पर्व को धूमधाम से मनाते है।

Lohri Festival 

प्रश्न -: मकर संक्रांति 14 तारीख को ही क्यों मनाई जाती है?

उत्तर -: क्योकि इस दिन देवताओ का वास शुरू हो जाता है। और सूर्य दक्षिण से उत्तरी गोलार्थ में गमन करने लगता है। इसलिए ये चौदह जनवरी को मनाया जाता है।

प्रश्न -: मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व क्या है?

उत्तर -: इस दिन से दिन और रात के समय में बहुत अंतर् होना शुरू हो जाता है। दिन बड़े और राते छोटी होनी शुरू हो जाती है। और प्रकाश की मात्रा अधिक होनी शुरू हो जाती है। और इससे मानव शरीर की शक्ति में बढ़ोतरी होती है।

निष्कर्ष
इस पोस्ट में हमने आपको लोहड़ी के बारे में पूरी जानकारी दी है। अगर आपको इसमें कुछ भी त्रुटि नजर आती है तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताये। हम उसको तुरंत ठीक करेंगे। और पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसको दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे।

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