तेनाली राम के किस्से कहानिया और जीवन परिचय Tenali Rama Stories in Hindi

Tenali Rama -: तेनालीराम राम एक कवी और बहुत ही तेज दिमाग के इंसान थे। उनकी कहानिया और किस्से तो आपने बहुत सुने होने लेकिन इस पोस्ट में उनके जीवन के बारे में सभी जानकारी आपको मिलने वाली है। तेनाली राम ने अपने जीवनकाल में बहुत सी कविताये और कहानिया लिखी है और आपने उनकी कहानिया पढ़ी भी होंगी। तेनाली राम अपनी तेज बुद्धि और हंसी मजाक के लिए बहुत पर्सिद थे। उनके जीवन से जुडी सभी जानकारिया आपको इस लेख में मिलेगी।

तेनाली राम का जीवन परिचय (Tenali Ramakrishna Biography in Hindi)

तेनालीराम ब्राह्मण परिवार से सम्बन्ध रखते थे। उनके पिता गरलापति पुरोहित का काम किया करते थे। उनकी माता का नाम लक्ष्मा देवी था और वो एक ग्रहणी महिला था। बहुत कम उम्र में तेनालीराम के पिता का साया उनके सर से उठ गया था। इसके बाद उनकी माँ उनको लेकर अपने गांव चली गई। वही उनका जीवन बिता था।

Tenali Ram Biography

तेनाली राम से जुडी सभी जानकारिया इस टेबल में दी गई है।
Tenali RamDetails
पूरा नामतेनाली रामाकृष्ण
उपनामविकट कवि
जन्म स्थानगुंटूर आंध्रप्रदेश
जन्म तिथि16वीं शताब्दी
पेशा कवि
पिता का नाम गरलापति रमय्या
माता का नाम लक्ष्मम्मा
गोत्र ब्राह्मण
नागरिकता भारतीय
धर्म हिन्दू
उनकी कहानियाव्यापारी और तेनाली, चोरों को पकड़ने की कहानी, तेनाली और बिल्ली की कहानी, हीरों का सच, सुब्बा शास्त्री को सबक मिला, ब्राह्मण किसकी पूजा करे, अन्तिम इच्छा, लाल मोर, महामूर्ख, पड़ोसी राजा, अंगूठी चोर, जादूगर का घमंड, बाबापुर की रामलीला, बेशकीमती फूलदान, मौत की सजा, नीलकेतु और तेनालीराम, रंग-बिरंगे नाखून,
कौवों की गिनती, मनहूस कौन ?, राजगुरु की चाल, रिश्वत का खेल, तेनालीराम की खोज, तेनालीराम मटके में, सात जूते मारने वाली चमेली, तेनालीराम की मनपसन्द मिठाई, बूढ़ा भिखारी और महाराज कृष्णदेवराय की उदारता, दूध न पीने वाली बिल्ली, नली का कमाल, मृत्युदंड की धमकी, रंग-बिरंगी मिठाइयां,

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तेनाली राम और राजा देव कृष्ण राय (Tenali Rama and Krishnadevaraya)

Tenali Rama का जन्म आँध्रप्रदेश के गुंटूर जिले के गरलपाडु नामक गांव में सोलहवीं शताब्दी में हुआ था। उनका परिवार एक तेलगु ब्राह्मण परिवार था। तेनाली राम एक लेखक और कवी थे। और तेलगु भाषा के महान ज्ञानी कवी थे। वो अपनी तेज तर्राट बुद्धि के लिए भी पर्सिद थे। उनसे वाक् चतुराई में कोई नहीं जित सकता था। इसलिए उनको विकट कवी के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली राम महाराज कृष्ण देव राय के समय में उनके दरबारी कवी रहे है। और मंत्री पद को भी सँभालते थे। तेनाली राम अपनी तेज बुद्धि के दम पर महाराज कृष्ण देव राय की हर समस्या का समाधान तुरंत कर देते थे। उनकी ज्ञांवर्धर्क बहुत सी कहानिया और किस्से आपको किताबो में पढ़ने को मिल जायेंगे। 

तेनाली राम की शिक्षा और पालन पोषण

Tenali Rama के पिता के निधन के बाद उनकी माता जी तेनाली राम को लेकर अपने गांव चली गई थी। और यही पर उनका पालन पोषण और पढाई पूरी हुई थी। उनको अपने मामा के यहाँ पर रामकृष्णा के नाम से जाना जाने लगा था। तेनाली राम ने कोई भी औपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं थी। लेकिन अपने तेज बुद्धि और दिमाग से तेनाली राम एक पर्सिद विद्वान् बने।

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तेनाली राम ने हिन्दू धर्म से सम्बन्धित बहुत से रचनाये लिखी है। कहा जाता है की तेनाली राम को एक बार किसी मुनि ने काली माँ की उपासना करने का सुझाव दिया था। और तेनाली राम ने काली माँ की परचंड भक्ति की। इससे खुश होकर काली माँ ने उनको दर्शन दिए थे और उनको दो कटोरे दिए थे। जिसमे एक कटोरा दही से भरा था जो धन का प्रतीक था और दूसरा कटोरा दूध से भरा था। और ये दूध वाला कटोरा बुद्धिमता का प्रतीक था। तेनाली राम को देवी ने कहा की कोई भी एक कटोरा चुन ले लेकिन तेनाली राम ने दोनों कटोरे ले लिए। इसलिए वो बहुत तेज दिमाग और धनवान इंसान बने थे।

तेनाली पर बनी फिल्में  (Tenali Rama Movie Story and Cartoon Serial)

  • 1956 में में बनी तेलगु फिल्म तेनाली रामकृष्णा में तेनाली राम के जीवन और उनके तेज दिमाग की कहानियो के बारे में बताया गया है। इस फिल्म का निर्देशन बीअसरंगा ने किया था। और इस फिल्म में नन्दमूरी तारक रामाराव ने कृषणदेवराय का किरदार किया था। ये फिल्म तमिल में भी बनाई गई है।
  • हास्यरत्न रामकृष्ण 1982 में बनी थी। ये एक कन्नड़ भाषा की फिल्म थी
  • द एडवेंचर्स ऑफ तेनाली रामा एक कार्टून फिल्म है जो की तेनाली रमा पर बनाई गई है। इस कार्टून फिल्म में तेनाली राम के जीवन पर आधारित सभी किस्से और कहानीयो के बारे में बताया गया है। वही दूरदर्शन पर आने वाले नाटक तेनाली रामा में भी उनकी कहानियो को दिखाया गया है। और बहुत सी किताबो में उनकी कहानियो के बारे में लिखा गया है।

सुनहरा पौधा (Tenali Rama Story In Hindi)

तेनालीराम हर बार अपने दिमाग का इस्तेमाल करके ऐसा कुछ करते थे कि विजय नगर के महाराज कृष्णदेव दंग रह जाते थे।  इस बार उन्होंने एक तरकीब से राजा को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को मजबूर कर दिया। हुआ यूं कि एक बार राजा कृष्णदेव किसी काम के चलते कश्मीर चले गए। वहां उन्हें एक सुनहरे रंग का खिलने वाला फूल दिखा। वो फूल महाराज को इतना पसंद आया कि वो अपने राज्य विजयनगर लौटते समय उसका एक पौधा अपने साथ लेकर आ गए। महल पहुंचते ही उन्होंने माली को बुलाया। माली के आते ही महाराज ने उससे कहा, “देखो! इस पौधे को हमारे बगीचे में ऐसी जगह लगाना कि मैं इसे अपने कमरे से रोज देख सकूं। इसमें सुनहरे रंग के फूल खिलेंगे, जो मुझे काफी पसंद हैं। इस पौधे का काफी ख्याल रखना। अगर इसे कुछ भी हुआ, तो तुम्हें प्राण दंड भी मिल सकता है।

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सुनहरा पौधा Tenali Rama Stories

माली ने सिर हिलाते हुए राजा से पौधा लिया और उनके कमरे से दिखने वाली जगह में उसे लगा दिया। दिन रात माली उस फूल का खूब ख्याल रखता था। दिन जैसे ही बीतते गए उसमें सुनहरे फूल खिलने लगे। रोज राजा उठते ही सबसे पहले उसे देखते और फिर दरबार जाते थे। अगर किसी दिन राजा को महल से बाहर जाना पड़ता था, तो उस फूल को न देख पाने के कारण उनका मन दुखी हो जाता था। एक दिन जब राजा सुबह उस फूल को देखने के लिए अपनी खिड़की पर आए, तो उन्हें वो फूल दिखा ही नहीं। तभी उन्होंने माली को बुलवाया। महाराज ने माली से पूछा, “वो पौधा कहा गया। मुझे उसके फूल क्यों दिख नहीं रहे हैं।” जवाब में माली ने कहा, “साहब! उसे कल शाम को मेरी बकरी खा गई।” इस बात को सुनते ही उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

Tenali Rama and Krishandevray Story

उन्होंने सीधे राजमाली को दो दिन बाद मौत की सजा सुनाने का आदेश दे दिया। तभी वहां सैनिक आए और उसे जेल में डाल दिया। माली की पत्नी को जैसे ही इस बारे में पता चला, वो दरबार में राजा से फरियाद करने पहुंची। गुस्से में महाराज ने उसकी एक बात न सुनी। रोते-रोते वो दरबार से जाने लगी। तभी एक व्यक्ति ने उसे तेनालीराम से मिलने की सलाह दी। रोते हुए माली की पत्नी ने तेनालीराम को अपने पति को मिली मौत की सजा और उस सुनहरे फूल के बारे में बताया। उसकी सारी बात सुनकर तेनालीराम ने उसे समझा-बुझाकर घर भेज दिया। अगले दिन गुस्से में माली की पत्नी उस सुनहरा फूल खाने वाली बकरी को चौराहे में ले जाकर डंडे से पीटने लगती है। ऐसा करते-करते बकरी अधमरी हो गई। विजयनगर राज्य में पशुओं के साथ इस तरह का व्यवहार करना मना था। इसे क्रूरता माना जाता था

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महाराज कृष्णराज

इसलिए कुछ लोगों ने माली की पत्नी की इस हरकत की शिकायत नगर कोतवाल को कर दी। सारा मामला जानने के बाद नगर कोतवाल के सिपाहियों को पता चला कि यह सब माली को मिले दंड की वजह से वो गुस्से में कर रही है। यह जानते ही सिपाही इस मामले को दरबार में लेकर गए। महाराज कृष्णराज ने पूछा कि तुम एक जानवर के साथ इतना बुरा व्यवहार कैसे कर सकती हो? ऐसी बकरी जिसके कारण मेरा पूरा घर उजड़ने वाला है। मैं विधवा होने वाली हूं और मेरे बच्चे अनाथ होने वाले हैं, उस बकरी के साथ कैसा व्यवहार करूं महाराज” माली की पत्नी ने जवाब दिया। राजा कृष्णराज ने कहा, “तुम्हारी बात का मतलब मैं समझ नहीं पाया।

Krishan Dev Ray  and Tenali Rama story in hindi

ये बेजुबान जानवर तुम्हारा घर कैसे उजाड़ सकता है?” उसने बताया, “साहब! ये वही बकरी है जिसने आपके सुनहरे पौधे को खा लिया था। इसकी वजह से आपने मेरे पति को मौत की सजा सुना दी है। गलती तो इस बकरी की थी, लेकिन सजा मेरे पति को मिल रही है। सजा असल में इस बकरी को मिलनी चाहिए, इसलिए मैं इसे डंडे से पीट रही थी।” अब महाराज को यह बात समझ आई कि गलती माली की नहीं, बल्कि बकरी की थी। यह समझते ही उन्होंने माली की पत्नी से पूछा कि तुम्हारे पास इतनी बुद्धि कैसे आई कि इस तरह से मेरी गलती के बारे में समझा सको। उसने कहा कि महाराज, मुझे रोने के अलावा कुछ भी नहीं सूझ रहा था।

यह सब मुझे पंडित तेनालीराम जी ने समझाया है। एक बार फिर राजा कृष्णराय को तेनालीराम पर गर्व महसूस हुआ और उन्होंने कहा कि तेनालीराम तुमने मुझे एक बार फिर बड़ी गलती करने से रोक दिया। यह कहते ही महाराज ने माली का मृत्यु दंड का फैसला वापस लेते हुए उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही तेनालीराम को उनकी बुद्धि के लिए पचास हजार स्वर्ण मुद्राएं उपहार के रूप में दीं।

स्वर्ग की कुंजी 

एक बार विजयनगर में एक साधु का आगमन हुआ. वह नगर के बाहर एक पेड़ के नीचे बैठकर साधना करने लगा. विजयनगर में उसके बारे में यह बात प्रसारित हो गई की वह एक सिद्ध साधु है, जो चमत्कार कर सकता है. सभी लोग उसके दर्शन के लिए धन, भोजन, फल-फूल के चढ़ावे के साथ जाने लगे. तेनाली राम को जब इस संबंध में ज्ञात हुआ, तो वह भी साधु से मिलने पहुँचा. वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि साधु के सामने चढ़ावे का ढेर लगा हुआ है और नगर के लोग आँखें बंद कर आराधना में लीन हैं. उसने देखा कि साधु अपनी आँखें बंद कर कुछ बुदबुदा रहा है. तेनाली राम कुशाग्र बुद्धि था. साधु के होंठों की गति देख वह क्षण भर में ही समझ गया कि साधु कोई मंत्रोच्चार नहीं कर रहा है है,

Tenali Rama Stories in Hindi

बल्कि अनाप-शनाप कह रहा है. साधु ढोंगी था. तेनालीराम ने  उसे सबक सिखाने का निर्णय किया. वह साधु के पास गया और उसकी दाढ़ी का एक बाल खींचकर तोड़ दिया और कहने लगा की कि उसे स्वर्ग की कुंजी मिल गई है.उसने घोषणा की कि ये साधु चमत्कारी हैं. इनके दाढ़ी का एक अबर अपने पास रखने से मृत्यु उपरांत स्वर्ग की प्राप्ति होगी. यह सुनना था कि वहाँ उपस्थित समस्त लोग साधु की दाढ़ी का बाल तोड़ने के लिए तत्पर हो गए. तेनालीराम द्वारा अपनी दाढ़ी का बाल खींचे जाने से हुई पीड़ा से साधु उबरा नहीं था. उसकी घोषणा सुन वह तुरंत समझ गया कि लोग उसके साथ क्या करने वाले हैं.  वह जान बचाकर वहाँ से भाग गया. तब तेनालीराम ने उपस्थित लोगों को वस्तुस्थिति से अवगत काराया और ऐसे ढोंगियों से दूर रहने की नसीहत दी.

एक अपराधी

एक दिन की बात हैं , राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में मुखातिब थे , और अपने मंत्री – महामंत्री के साथ चर्चा कर रहे थे। पंडित तेनालीराम भी भरी सभा में हाजिर थे। अचानक चरवाहा भरी सभा में उपस्थित हुआ और महाराज न्याय कीजिए , महाराज न्याय कीजिए ऐसा चिल्लाने लगा। महाराज ने उसे कहा वत्स धीरज रखो , क्या हुआ हैं हमें विस्तार से बताओ।
चरवाहा ने बात रखते हुए राजा से कहा , मेरे सामने एक लोभी आदमी बरसो से रह रहा हैं। जिसके घर की हालत खंडहर जैसी हो जाने के बावजूत वो घर की मरम्मत नहीं करवाता।

कल मेरी बकरी उसके घर की दीवाल गिरने से मर गई। ये चरवाहे का एक राजा से निवेदन है की कृपया मेरी सहायता कजिए और मेरी बकरी का हर्जाना दिलवाने में मेरी मदद कीजिए। तेनाली ने सभी बात धीरज से सुनी थी बात पूरी होते ही सहजता से बोलै , महाराज दीवार गिरने के लिए केवल पडोशी ही जिन्मेदार नहीं। राजाने बड़ी ही नवीनता से पूछा तो फिर तुम्हारे नजरिए से दोषी कोन हैं ? तेनालीराम ने महाराज से विनंती करते हुए कहा , मुझे इस बात की गहराई को जानने के लिए थोड़ा समय दीजिए तब जाकर में असली गुनेगार को आपके सामने पस्तुत कर दूंगा”

Tenali Ramakrishna Story

राजा कृष्णदेवराय ने तेनाली की विंनती का मान रखते उसे हुए थोड़ा समय दिया। बात की सबिती के लिए चरवाहे के पडोशी को राज दरबार में बुलाया गया। पड़ोशी ने अपनी सफाइ देते हुए कहा , कृपानिधान में इसके लिए दोषी नहीं हु। यह दीवार मैंने किसी और मिस्त्री के हाथो बनवाई थी तो अपराधी तो वो हुआ। तेनाली ने मिस्त्री को दरबार में बुलवाया , मिस्त्री ने खुद को बचाते हुए राजा से कहा , महाराज में अपराधी नहीं हु।मेरा इस बात से कोई संबध नहीं। असली दोष तो उन मजूर लोगो का हैं जिसकी नियत में खोट थी और ज्यादा पानी के इस्तमाल से ईंट अच्छे से चिपक नहीं पाई जिसकी वजह से दीवार गिर गई। आपको अपनी वसूली के लिए मजूर को बुलाना चाहिए।

Tenali Rama Stories

राजा के आदेश से सिपाही मजदूर को दरबार में बुला लाए। मजदूर ने स्वयं को बचाते हुए कहा , गुनेगार तो वह पानी वाला व्यक्ति हैं। जिसने अधिक मात्रा में पानी मिलाया था। पानी वाले को दरबार में पैस किया गया , वह बोला महाराज मुझे पानी बड़े बरतन दिया गया था जिसकी वजह से आवयश्कता से अधिक पानी भर गया था , और पानी की मात्रा अधिक होने पर भी ज्ञात न रहा। मेरे हिसाब से उस व्यक्ति को दोषी ठहरना चाहिएजिसने पानी भरने के लिए मुझे बड़ा सा बरतन दिया था।

तेनाली राम ने उस पानी वाले व्यक्ति को कहते हुए पूछा तुम्हे पानी का वह बड़ा सा बरतन कहा से मिला था। पानी वाले आदमी ने सहजता से कहा पानी वाला बरतन मुझे चरवाहे ने दिया था। बड़ा बरतन होने के कारण पानी की मात्रा कितनी हैं यह पता न चला। तेनालीराम ने बड़े ही ठहराव से उस चरवाहे से कहा , यह सब कुछ तुम्हारी वजह से ही हुआ हैं। तुम्हारी एक गलती ने तुम्हारी अपनी बकरी की जान ली हैं।
चरवाहा बड़ा लज्जित हो कर राज दरबार से अपने घर की ओर चल पड़ा , राजदरबार में उपस्थित नगरजानो ने तेनालीराम की बुद्धि , चातुर्य की बड़ी ही प्रंशशा की।

तेनाली रामा से जुड़ी कुछ रोचक बातें (Tenali Rama Insteresting Facts)

  • तेनाली रामा का जन्म एक हिन्दू ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
  • लेकिन वो शिव के बड़े उपाशक थे इसलिए उन्होंने शैव धर्म को अपना लिया था।
  • इसके बाद उन्होंने वैष्णव धर्म को अपना लिया और अपना नाम बदल कर रामकृष्ण रख लिया।
  • तेनाली राम को विकट कवी के उपनाम से जाना जाता है।
  • तेनाली राम अपनी तेज बुद्धि की वजह से कृष्ण देवराय के दरबार में मंत्री पद पर रहे थे
  • और उनकी हर समस्या को हल कर देते थे।
  • तेनाली राम ने वैष्णव धर्म को अपना लिया था
  • इसी की वजह से उन्हें अपने नियम-कायदों के लिए मशहूर गुरुकुल में शिक्षा देने से मना कर दिया गया था
  • जिसके चलते तेनाली रामा जी हमेशा ही अशिक्षित रह गए थे
  • हालांकि अशिक्षित होने के बाद भी उनकी गणना महान पंडितों और ज्ञानियों में होती है।
  • तेनाली राम जिद के पक्के इंसान थे वो कभी किसी के सामने नहीं झुकते थे।

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